रविवार, 30 मार्च 2008

तुम कविता हो ...

मैं कवि ! प्रिये तुम कविता हो
मैं प्यासा तट तुम सरिता हो
है साथ हमारा युग - युग से
युग - युग तक साथ निभाना है

सौ बार बने सौ बार मिटे
तन की मिट्टी से क्या लेना ?
केवल मन के बन्धन सच्चे
मन - बन्धन में बन्ध जाना है !!

युग - युग तक साथ निभाना है ...

हर जन्म हुई अपनी रचना
तुम ' शीरी ' मैं ' फ़रहाद ' बना
तुम ' लैला ' की आवाज़ बनीं
मैं ' मजनूँ ' की फ़रियाद बना
तुम ' राधा ' थीं मैं ' श्याम ' बना
तुम ' सीता ' और मैं ' राम ' बना
हर बार नई सूरत पाई
हर बार नया एक ' नाम ' बना

हर जन्म ' तुम्हें ' पाया मैनें
हर जन्म ' तुम्हें ' ही पाना है
केवल मन के बन्धन सच्चे
मन - बन्धन में बन्ध जाना है !!

युग - युग तक साथ निभाना है ...

-- प्रमोद कुमार कुश ' तनहा '

9 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा ने कहा…

तुम और मैं का सुन्दर बन्धन,
खूबसूरती से पिरोया गया है.......

Sneha ने कहा…

bahot bahot badhai ho.. kya khubsurat kavitayen likhi hei aapne........gud gng..

Parul ने कहा…

bahut sundar bhaav...sahaj bahaav hai inmey

*KHUSHI* ने कहा…

हर जन्म ' तुम्हें ' पाया मैनें
हर जन्म ' तुम्हें ' ही पाना है
केवल मन के बन्धन सच्चे
मन - बन्धन में बन्ध जाना है !!

^ kitna umda likha hai....

pramod kumar kush 'tanha' ने कहा…

Rashmi ji,Snehaji, Parul ji aur Khushi ji - aap sab ka shukriya, meray blog par visit karne aur kavita pasand karne ke liye.

aap sab ke liye meri shubhkaamnaayein...

- p k kush 'tanha'

meenakshi ने कहा…

i have read this poem many a times..beautiful...!!!

seema gupta ने कहा…

मैं कवि ! प्रिये तुम कविता हो
मैं प्यासा तट तुम सरिता हो
है साथ हमारा युग - युग से
युग - युग तक साथ निभाना है
" sabdon ke motee koee aapse peerona seekhe, iss seekhne ke daud mey hum to shamil ho gyen hain"

Regards

prawir ने कहा…

pyar ki asim unchai ki aapki ye rachna kafi achha laga, waise me aapko sun chuka hun.waise aapko sunne ka v moka mila hai

Here We Go ने कहा…

kamal ke........

-http://www.sushantakumar.blogspot.com