शनिवार, 23 जनवरी 2010

सभी खुशियाँ तुम्हारे नाम लिख दूँ ...


हवा भी आज कुछ गाने लगी है
तुम्हारा नाम दोहराने लगी है

तुम्हारी ज़िन्दगी रोशन रहेगी
सितारों से 'सदा' आने लगी है

रुको तुम जिस जगह मंज़िल वहीं है
ये राहों से ख़बर आने लगी है

तुम्हारे ख़्वाब हों सारे हकीक़त
हमें ये 'सोच' भी भाने लगी है

उजालों पे तुम्हारी मेहरबानी
अंधेरों पे क़हर ढाने लगी है

सभी खुशियाँ तुम्हारे नाम लिख दूँ
यही लब पे दुआ आने लगी है

नहीं मिलते किनारे साथ चल के
यही इक 'टीस' तड़पाने लगी है

- प्रमोद कुमार कुश 'तनहा'

4 टिप्‍पणियां:

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

bahut khoobsurat dua hai dost ke liye.apke dost k liye hamari bhi janam din par badhayi aur duai sweekar kare.

acchhi pavitr rachna.

kshama ने कहा…

Hameshaki tarah khoob soorat rachna!
Gantantr diwas kee dheron shubhkamnayen!

kshama ने कहा…

Phir ekbaar rachana padhi..phir se utnahee lutf aaya!

संजय भास्‍कर ने कहा…

प्रशंसनीय रचना - बधाई
शब्दों की मुस्कुराहट पर ….माँ तुम्हारे लिए हर पंक्ति छोटी है

शब्दों की मुस्कुराहट पर ….शेर खान को शत शत नमन :)